श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज
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जिस दूल्हे की शराब के कारण शादी ठुकराई… आखिर उसी का थामा काउंसलर मुस्कान लौटीं, पुलिस बोली– सकुशल वापस आई हैं प्रकाश शर्मा जांजगीर-चांपा। कुछ दिन पहले तक शराब के विरोध में अपनी ही बारात लौटाकर पूरे छत्तीसगढ़ में साहस की मिसाल बनीं मुस्कान प्रधान अब एक नए घटनाक्रम को लेकर फिर चर्चा में हैं। महिला परिवार परामर्श केंद्र की काउंसलर मुस्कान के गुरुवार दोपहर संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने की सूचना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। देर शाम तक घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद उनकी तलाश शुरू की गई।हालांकि देर रात मामले में नया मोड़ आया। पुलिस अधीक्षक विजय पांडे ने पुष्टि की कि मुस्कान सकुशल वापस लौट आई हैं। उन्होंने बताया कि लापता होने की सूचना मिलने पर पुलिस सक्रिय हुई थी, लेकिन अब वह सुरक्षित हैं।मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार इसलिए भी गर्म है क्योंकि मुस्कान वही युवती हैं जिन्होंने कुछ समय पहले कथित रूप से शराब के नशे में पहुंचे दूल्हे की बारात लौटा दी थी। इस साहसिक फैसले की पूरे प्रदेश में सराहना हुई थी। इसके बाद जांजगीर-चांपा पुलिस ने उनके सामाजिक साहस और जागरूकता को सम्मान देते हुए उन्हें महिला परिवार परामर्श केंद्र में काउंसलर की जिम्मेदारी सौंपी थी। पुलिस अधिकारियों ने उस समय कहा था कि मुस्कान अब पारिवारिक विवादों के समाधान, महिला जागरूकता और नशामुक्त समाज के अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।अब इसी मामले ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया है। एक स्थानीय पत्रकार को दिए गए इंटरव्यू में मुस्कान और संबंधित युवक ने दावा किया है कि दोनों ने अपनी इच्छा से विवाह कर लिया है। वहीं युवक का कहना है कि शादी वाले दिन उसके शराब के नशे में होने की बात एक साजिश थी और उसे गलत तरीके से प्रचारित किया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।फिलहाल पुलिस ने मुस्कान के सकुशल लौट आने की पुष्टि कर दी है। वहीं, शादी से जुड़े दावों और पहले हुए घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं जारी हैं। यदि इस मामले में दोनों पक्षों या पुलिस की ओर से आगे कोई आधिकारिक दस्तावेज या बयान सामने आता है, तो तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
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जिस दूल्हे की शराब के कारण शादी ठुकराई… आखिर उसी का थामा हाथ! लापता काउंसलर मुस्कान लौटीं, पुलिस बोली– सकुशल वापस आई हैंप्रकाश शर्माजांजगीर-चांपा। कुछ दिन पहले तक शराब के विरोध में अपनी ही बारात लौटाकर पूरे छत्तीसगढ़ में साहस की मिसाल बनीं मुस्कान प्रधान अब एक नए घटनाक्रम को लेकर फिर चर्चा में हैं। महिला परिवार परामर्श केंद्र की काउंसलर मुस्कान के गुरुवार दोपहर संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने की सूचना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। देर शाम तक घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद उनकी तलाश शुरू की गई।हालांकि देर रात मामले में नया मोड़ आया। पुलिस अधीक्षक विजय पांडे ने पुष्टि की कि मुस्कान सकुशल वापस लौट आई हैं। उन्होंने बताया कि लापता होने की सूचना मिलने पर पुलिस सक्रिय हुई थी, लेकिन अब वह सुरक्षित हैं।मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार इसलिए भी गर्म है क्योंकि मुस्कान वही युवती हैं जिन्होंने कुछ समय पहले कथित रूप से शराब के नशे में पहुंचे दूल्हे की बारात लौटा दी थी। इस साहसिक फैसले की पूरे प्रदेश में सराहना हुई थी। इसके बाद जांजगीर-चांपा पुलिस ने उनके सामाजिक साहस और जागरूकता को सम्मान देते हुए उन्हें महिला परिवार परामर्श केंद्र में काउंसलर की जिम्मेदारी सौंपी थी। पुलिस अधिकारियों ने उस समय कहा था कि मुस्कान अब पारिवारिक विवादों के समाधान, महिला जागरूकता और नशामुक्त समाज के अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।अब इसी मामले ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया है। एक स्थानीय पत्रकार को दिए गए इंटरव्यू में मुस्कान और संबंधित युवक ने दावा किया है कि दोनों ने अपनी इच्छा से विवाह कर लिया है। वहीं युवक का कहना है कि शादी वाले दिन उसके शराब के नशे में होने की बात एक साजिश थी और उसे गलत तरीके से प्रचारित किया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।फिलहाल पुलिस ने मुस्कान के सकुशल लौट आने की पुष्टि कर दी है। वहीं, शादी से जुड़े दावों और पहले हुए घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं जारी हैं। यदि इस मामले में दोनों पक्षों या पुलिस की ओर से आगे कोई आधिकारिक दस्तावेज या बयान सामने आता है, तो तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
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राजनीति में भरोसे का संकट: अपने ही सबसे बड़े खतरा राजनीति को सेवा का माध्यम कहा जाता है। लेकिन आज के दौर में यह क्षेत्र सबसे ज्यादा चुनौती भरा हो गया है। और सबसे बड़ी चुनौती है – अपने और पराये की पहचान।पहले राजनीति में विचारधारा, सिद्धांत और निष्ठा की बात होती थी। कार्यकर्ता दशकों तक एक झंडे के नीचे काम करते थे। हार-जीत से ऊपर पार्टी और नेता का साथ निभाते थे। लेकिन मौजूदा परिवेश में यह तस्वीर बदल गई है। भरोसे की कड़ी कमजोर क्यों हुई?आज टिकट , पद और पावर के लिए निष्ठा की कीमत लगने लगी है। कल तक मंच पर साथ खड़े होकर नारे लगाने वाला, आज दूसरी पार्टी के मंच से विरोध करता दिख जाता है। वरिष्ठ नेता शरद पवार, ममता बनर्जी जैसे उदाहरण हमारे सामने हैं। जिन्हें अपनी ही बनाई पार्टी को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। सबूत जुटाने पड़े। अपनों से ही अपनी पार्टी बचानी पड़ी। जब शीर्ष स्तर पर यह हाल है तो जमीनी स्तर पर क्या होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। राजनीति में “घात करके वार” करना कोई नई बात नहीं है। लेकिन अब इसका तरीका बदल गया है।सामने “जय हो” और पीठ पीछे “साजिश हो”। सार्वजनिक मंच पर तारीफ और बंद कमरे में विरोध।व्हाट्सएप ग्रुप में एक बात और जनता के बीच दूसरी बात।इस दोहरे चरित्र ने कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा है। मेहनती कार्यकर्ता सोचता है – “मैं दिन-रात मेहनत करूं और कल कोई मेरा नाम ही काट दे तो?”दुख की बात यह है कि अब यह बीमारी पंचायत और स्थानीय निकाय तक पहुंच गई है। जहां राजनीति की पाठशाला मानी जाती है , वहां भी अब व्यक्तिगत सम्मान और सार्वजनिक सम्मान के मापदंड अलग-अलग हो गए हैं। सामने “भैया” और पीठ पीछे “साजिश”। इसका सीधा असर जनता के भरोसे पर पड़ रहा है। लोग कहने लगे हैं – “सब एक जैसे हैं”। इस संकट से निकलने का एक ही रास्ता है – संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना। टिकट और पद वितरण में निष्ठा को प्राथमिकता।जो जमीन पर काम कर रहा है उसे सार्वजनिक मंच पर सम्मान गद्दारी और दोहरे चरित्र पर जीरो टॉलरेंसनेता और कार्यकर्ता का रिश्ता परिवार जैसा होना चाहिए। परिवार में धोखा नहीं होता। जब तक हम अपनों पर भरोसा नहीं कर पाएंगे, तब तक जनता हम पर भरोसा नहीं करेगी। और जब तक जनता का भरोसा नहीं जीतेंगे, सत्ता का रास्ता मुश्किल है। राजनीति विचारधारा से चलती है, सौदेबाजी से नहीं। निष्ठा से चलती है, अवसरवादिता से नहीं।
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राजनीति में भरोसे का संकट: अपने ही सबसे बड़े खतरा राजनीति को सेवा का माध्यम कहा जाता है। लेकिन आज के दौर में यह क्षेत्र सबसे ज्यादा चुनौती भरा हो गया है। और सबसे बड़ी चुनौती है – अपने और पराये की पहचान।पहले राजनीति में विचारधारा, सिद्धांत और निष्ठा की बात होती थी। कार्यकर्ता दशकों तक एक झंडे के नीचे काम करते थे। हार-जीत से ऊपर पार्टी और नेता का साथ निभाते थे। लेकिन मौजूदा परिवेश में यह तस्वीर बदल गई है। भरोसे की कड़ी कमजोर क्यों हुई?आज टिकट , पद और पावर के लिए निष्ठा की कीमत लगने लगी है। कल तक मंच पर साथ खड़े होकर नारे लगाने वाला, आज दूसरी पार्टी के मंच से विरोध करता दिख जाता है। वरिष्ठ नेता शरद पवार, ममता बनर्जी जैसे उदाहरण हमारे सामने हैं। जिन्हें अपनी ही बनाई पार्टी को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। सबूत जुटाने पड़े। अपनों से ही अपनी पार्टी बचानी पड़ी। जब शीर्ष स्तर पर यह हाल है तो जमीनी स्तर पर क्या होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। राजनीति में “घात करके वार” करना कोई नई बात नहीं है। लेकिन अब इसका तरीका बदल गया है।सामने “जय हो” और पीठ पीछे “साजिश हो”। सार्वजनिक मंच पर तारीफ और बंद कमरे में विरोध।व्हाट्सएप ग्रुप में एक बात और जनता के बीच दूसरी बात।इस दोहरे चरित्र ने कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा है। मेहनती कार्यकर्ता सोचता है – “मैं दिन-रात मेहनत करूं और कल कोई मेरा नाम ही काट दे तो?”दुख की बात यह है कि अब यह बीमारी पंचायत और स्थानीय निकाय तक पहुंच गई है। जहां राजनीति की पाठशाला मानी जाती है , वहां भी अब व्यक्तिगत सम्मान और सार्वजनिक सम्मान के मापदंड अलग-अलग हो गए हैं। सामने “भैया” और पीठ पीछे “साजिश”। इसका सीधा असर जनता के भरोसे पर पड़ रहा है। लोग कहने लगे हैं – “सब एक जैसे हैं”। इस संकट से निकलने का एक ही रास्ता है – संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना। टिकट और पद वितरण में निष्ठा को प्राथमिकता।जो जमीन पर काम कर रहा है उसे सार्वजनिक मंच पर सम्मान गद्दारी और दोहरे चरित्र पर जीरो टॉलरेंसनेता और कार्यकर्ता का रिश्ता परिवार जैसा होना चाहिए। परिवार में धोखा नहीं होता। जब तक हम अपनों पर भरोसा नहीं कर पाएंगे, तब तक जनता हम पर भरोसा नहीं करेगी। और जब तक जनता का भरोसा नहीं जीतेंगे, सत्ता का रास्ता मुश्किल है। राजनीति विचारधारा से चलती है, सौदेबाजी से नहीं। निष्ठा से चलती है, अवसरवादिता से नहीं।
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राजनीति में भरोसे का संकट: अपने ही सबसे बड़े खतराराजनीति को सेवा का माध्यम कहा जाता है। लेकिन आज के दौर में यह क्षेत्र सबसे ज्यादा चुनौती भरा हो गया है। और सबसे बड़ी चुनौती है – अपने और पराये की पहचान।पहले राजनीति में विचारधारा, सिद्धांत और निष्ठा की बात होती थी। कार्यकर्ता दशकों तक…
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जांजगीर शहर ब्लाक कांग्रेस की मासिक बैठक, विधायक ब्यास कश्यप ने संगठन को मजबूत करने और जन आंदोलन पर दिया जोरजांजगीर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश एवं जिला कांग्रेस कमेटी व ब्लाक कांग्रेस जांजगीर के मार्गदर्शन में जांजगीर शहर ब्लाक कांग्रेस कमेटी एवं तीनों मण्डलों के प्रभारियों की संयुक्त मासिक बैठक मंगलवार को आयोजित की गई।बैठक में संगठन को मजबूत करने, आगामी कार्ययोजनाओं पर चर्चा, शहर की समस्याओं के निराकरण और सरकार की विफलताओं को जनता तक पहुंचाने पर विस्तृत मंथन किया गया।विधायक ने कहा – जन आंदोलन की जरूरतबैठक को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता * ब्यास कश्यप* ने कहा कि शहर की जनता कई समस्याओं से जूझ रही है। इन समस्याओं को लेकर सड़क से लेकर सदन तक आवाज उठानी होगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और जनता के बीच जाकर सरकार की नाकामियों को उजागर करने का आह्वान किया।नेताओं ने रखे विचारबैठक को पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रमेश पैगवार, भगवान दास गढ़वाल, नगर अध्यक्ष रामबिलास राठौर*, नेता प्रतिपक्ष नपा *प्रिंस शर्मा*, * ऋषिकेश उपाध्याय*, * अनिल राठौर*, पार्षद *प्रीतम कश्यप*, *अरमान खान*, * देवराज सिंह*, *श्री विजय अग्रवाल*, *अनिल चौरसिया*, *अमन अग्रवाल*, *राजू शर्मा* सहित अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया। सभी नेताओं ने एकजुट होकर संगठन को मजबूत करने और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करने पर बल दिया।बैठक का संचालन रफीक सिद्धकी ने किया।बैठक में परमेश्वर निर्मले, बसंत अग्रवाल, शेषनाथ टंडन, किशन आदित्य, लाला राठौर, रवि राठौर, छतराम कहरा, चंद्र कुमार ओगरे, बेदी यादव, महेश खरे, अनिल वर्मा, घनश्याम खरे, राजकुमार सारथी, महेन्द्र कश्यप, राखी सारथी, जितेन्द्र दिनकर सहित तीनों मण्डलों के अध्यक्ष, प्रभारी एवं बड़ी संख्या में कांग्रेसी उपस्थित थे।