विष्णु देव सरकार ने बहाल की लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि, 5 साल का बकाया भी दिया
2018 से रुका था भुगतान। जिलाध्यक्ष गोपाल शर्मा ने कहा – सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों का मान बढ़ाया
जांजगीर-चांपा। देश में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लगे आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल गए योद्धाओं को अब सम्मान के साथ आर्थिक संबल भी मिलेगा। आपातकाल योद्धाओं/मीसाबंदियों को शासन द्वारा “लोकतंत्र सेनानी” का दर्जा दिया गया है। छत्तीसगढ़ में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सरकार ने 2008 में “लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि” योजना शुरू की थी। यह योजना 2018 तक निरंतर चलती रही।
लेकिन वित्तीय आवंटन के बावजूद जांजगीर-चांपा जिले के लोकतंत्र सेनानियों को नवंबर-दिसंबर 2018 की सम्मान निधि आज तक नहीं मिली। लोकतंत्र सेनानियों ने इसके लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सहित कई स्तरों पर शिकायतें कीं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
2019 में तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने इस योजना को पूरी तरह बंद कर दिया था। इससे प्रदेशभर के उम्रदराज और बीमार लोकतंत्र सेनानियों में नाराजगी थी।विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में भाजपा सरकार बनते ही मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सम्मान निधि को पुनः बहाल करने का निर्णय लिया। सरकार ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रुकी हुई पिछले 5 साल की सम्मान निधि का एकमुश्त भुगतान किया। इसके साथ ही सरकार ने आपातकाल योद्धाओं के मान- सम्मान को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय और लिया है। अब लोकतंत्र सेनानियों के निधन पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार और मृत्युकर्म के लिए निकटतम आश्रित को 25 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।
जिलाध्यक्ष ने जताया आभार
इस निर्णय पर लोकतंत्र सेनानी संगठन के जिलाध्यक्ष गोपाल शर्मा ने कहा कि “मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आपातकाल में लोकतंत्र बचाने वाले योद्धाओं का सम्मान बढ़ाया है। 2018 से रुकी हुई राशि और 5 साल का बकाया एकमुश्त देने का फैसला स्वागत योग्य है। इससे सभी मीसाबंदी परिवारों में खुशी की लहर है। हम मुख्यमंत्री और भाजपा सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।”
प्रातिक्रिया दे