बाराद्वार।भाद्रपद की इस पावन बेला में जब सृजन के अधिष्ठाता देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती आई, तो पूरा बाराद्वार अंचल श्रद्धा और उल्लास के रंग में रंग गया। गुरुवार को सुबह से ही ऑटो सेंटर , कारखानों, वर्कशॉपों और गैरेजों में घंटियों की गूंज और आरती की थालियों की खनक सुनाई देने लगी। हर चेहरा भक्तिभाव से दमक रहा था, हर प्रतिष्ठान फूल-मालाओं से सजा था। अंचल के सरकारी, गैर सरकारी और निजी संयंत्रों, राइस मिलों, मोटर-बाइक गैरेजों तथा निर्माण से जुड़े प्रतिष्ठानों में भगवान विश्वकर्मा की मनोहारी प्रतिमाएं स्थापित कर पूरे विधि- विधान से पूजा-अर्चना की गई। पूजन के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद बांटा गया। बाराद्वार स्थित पीडब्ल्यूआई कार्यालय परिसर में रेलवे कर्मचारियों ने देवशिल्पी की प्रतिमा स्थापित कर भक्तिमय वातावरण में आराधना की। यहां तीन दिनों तक विशेष पूजा-अनुष्ठान के पश्चात मूर्ति का विसर्जन किया जाएगा। रेलवे साइडिंग में श्रमिकों ने परंपरागत रीति से पूजन कर अपने औजारों को नमन किया।
डोलोमाइट माइनिंग कॉर्पोरेशन परिसर में आर.के. तिवारी, बजरंग अग्रवाल, मनीष तिवारी, कुलदीप शर्मा, राजा बाबू की गरिमामयी उपस्थिति में प्रतिमा स्थापना कर पूजा-अर्चना की गई। पूरा परिसर “जय श्री विश्वकर्मा” के जयघोष से गूंज उठा। इस पावन अवसर पर डीएमसी के आर.के. तिवारी ने कहा कि शास्त्रों में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के प्रथम शिल्पकार और निर्माण के देवता के रूप में वंदित किया गया है। द्वारिकापुरी का वैभव, पुष्पक विमान की कल्पना, इंद्र के वज्र की शक्ति, भोलेनाथ के त्रिशूल का तेज और इंद्रप्रस्थ की भव्यता, ये सभी उन्हीं के दिव्य शिल्प का प्रमाण हैं। इसीलिए सृजन और निर्माण से जुड़ा हर हाथ आज उनके चरणों में नतमस्तक होता है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा से भगवान विश्वकर्मा का पूजन करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। इंजीनियर, शिल्पकार, बुनकर, गैरेज और प्लांट संचालक इस दिन अपने औजारों और मशीनों की पूजा कर प्रार्थना करते हैं कि हे देवशिल्पी, हमारी मशीनें निरंतर गतिमान रहें, हमारा श्रम सार्थक हो और विश्व का निर्माण अविराम चलता रहे।

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