सक्ती | छत्तीसगढ़ में सुशासन की सरकार का दावा है, लेकिन सक्ती जिले में हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहां तहसील और पटवारी दफ्तरों में दलालों का राज चल रहा है और किसान फौती-नामांतरण जैसे छोटे-छोटे कामों के लिए महीनों से चक्कर काटने को मजबूर हैं।
ACB के डर से नया तरीका
बताया जा रहा है कि ACB की लगातार कार्रवाई के डर से अब अधिकारी सीधे पैसा नहीं लेते। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, दैनिक वेतनभोगी, कोटवार और गांव के कुछ दलालों के जरिए कमीशनखोरी का नया सिस्टम बना लिया गया है। जैजैपुर तहसील में तो अधिवक्ताओं ने कई बार लिखित शिकायत की है, फिर भी दलाल बेरोकटोक दफ्तर में बैठकर वसूली करते हैं।
किसान परेशान
नियमानुसार फौती, नामांतरण 30 दिन में होना चाहिए, लेकिन बिना दलाल के फाइल महीनों तक नहीं हिलती। मजबूरन किसानों को दलालों की शरण में जाना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में वर्षों से जमे कुछ तहसीलदार खुद को प्रभारी मंत्री का रिश्तेदार तो कोई खुद को बड़े मंत्री का करीबी बताकर पूरे सिस्टम को जेब में रखे हुए हैं।
11 सितंबर को बड़ी शिकायत
इस भ्रष्टाचार से तंग आकर भारतीय किसान संघ के बैनर तले सक्ती जिले के सैकड़ों किसान 11 सितंबर 2026 को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को ज्ञापन सौंपेंगे।
किसानों की एक ही मांग है – सक्ती जिले के सभी तहसील कार्यालयों में ACB की टीम तत्काल दबिश देकर दलालों और भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ का पर्दाफाश करे।
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