रामायण-महाभारत की जीवंत झांकियां होंगी आकर्षण का केंद्र, मारवाड़ी पंचायत धर्मशाला की सालों पुरानी परंपरा की धमक महानगरों तक


बाराद्वार। गणपति बप्पा मोरया की गूंज से बाराद्वार नगरी गूंजने वाली है। 14 सितंबर, सोमवार को शुभ मुहूर्त में विघ्नहर्ता अपने भव्य दरबार में विराजेंगे और उससे पहले ही पूरा नगर दुल्हन की तरह सज गया है। नगर के छोटे-बड़े सभी चौक- चौराहों में पंडाल सज रहे हैं। हर समिति अपने पंडाल को सबसे बेहतर साबित करने की होड़ में लगी है।
बाहर से देखने पर ये सिर्फ आस्था का पर्व लगता है, पर अंदर की हकीकत ये है कि गणेशोत्सव बाराद्वार क्षेत्र के लिए साल का सबसे बड़ा रोजगार उत्सव है। एक अनुमान के मुताबिक 11 दिन में लाखों रुपये का लेन-देन सिर्फ इसी उत्सव के कारण होता है। बांस-बल्ला, टेंट, लाइट, मूर्ति, फूल-माला, प्रसाद, मीना बाजार – सब मिलाकर पूरे क्षेत्र के लिए ब्यवसाय की दृष्टि से ये 11 दिनों खास होते है।
कलकत्ता के कलाकारों का दूसरा घर बना बाराद्वार
इस उत्सव की एक और खास बात यहां की मूर्तियां हैं। कलकत्ता से आए कलाकार यहां महीनों रहकर अपने सधे हाथों से मिट्टी को आकार देते हैं। बाराद्वार अब उनके लिए काम की जगह नहीं, दूसरे घर जैसा है।
मारवाड़ी पंचायत धर्मशाला – जहां मन्नतें होती हैं पूरी
बाराद्वार के गणेशोत्सव की बात हो और मारवाड़ी पंचायत धर्मशाला के गणेशोत्सव का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। यहां की पूजा सालों पुरानी परंपरा है। कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना जरूर पूरी होती है, इसलिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और देर रात तक भीड़ लगी रहती है। अब यह उत्सव सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं रहा, बाहर रह रहे रिश्ते-नातेदार भी इस अवसर पर बाराद्वार आते हैं।
“बप्पा के दरबार में मत्था टेका, किस्मत बदल गई”
उत्सव और मन्नत से जुड़ा अपना अनुभव साझा करते हुए लोग बताते हैं कि बाराद्वार आकर गणेश दरबार में मत्था टेकने से किस तरह उनकी किस्मत बदल गई, ऐसा लगता है मानों गजानन स्वामी ने कोई चमत्कार कर दिया; जीवन से सारे दुख दरिद्रता समाप्त हो गई।
जांजगीर के सुमीत कुमार बताते हैं , “शादी के 5 साल बाद भी संतान नहीं थी। 2023 में मैं यहां आया, सच्चे मन से मन्नत मांगी। आज 1 साल का बेटा है।”
वहीं बाराद्वार के मनोज कुमार कहते हैं, “कोरोना में मेरा कारोबार डूब गया था। 2022 में मैंने 11 दिन दरबार में सेवा की। ऐसा लगा मानों चमत्कार हो गया और मेरा व्यापार फिर चल पड़ा।”
सक्ती के दीपक बरेठ ने बताया, “3 साल से नौकरी नहीं लग रही थी। पिछले साल मन्नत मांगी और 4 महीने में ही नौकरी के लिये चयन हो गया।”
इस संबंध में सार्वजनिक मारवाड़ी धर्मशाला गणेशोत्सव समिति के वरिष्ठ सदस्य रमेश साँवड़िया ने बताया कि “यह परंपरा हमारे दादाओं के जमाने से चली आ रही है। यहां गणेश जी सिद्धि विनायक के रूप में विराजते हैं। जो भी सच्चे मन से मत्था टेकता है, बप्पा उसकी झोली खाली नहीं रखते। इसीलिए हम इसे सिर्फ उत्सव नहीं, आस्था का महाकुंभ कहते हैं। इस बार हमने बच्चों को धर्म का ज्ञान हो, इसके लिए रामायण-महाभारत की विशेष झांकियां और 11 दिन तक रोजाना खास तरह के प्रसाद की तैयारी की है।” आजाद बॉयज , तहलका ग्रुप , बिच्छू ग्रुप , पुराना नपं कॉम्प्लेक्स , सोसायटी रोड , दुर्गा मंदिर चौक , नेहरू चौक , मंडी चौक , हाई स्कूल वार्ड में भी उत्सव की शानदार तैयारी की गई है। कार्यकर्ता दिन-रात एक किये हुए हैं।
उत्सव पर लगेगा बड़ा मेला
उत्सव के दौरान बड़ा मेला भी लगता है। मीना बाजार सहित मनोरंजन के अनेक साधन और रेस्टोरेंट का लोग आनंद लेते हैं।
जानिए अबकी बार क्यों खास है गणेशोत्सव – शुभ मुहूर्त
इस वर्ष गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितंबर 2026 को है। सोमवार को बप्पा का विराजना अति शुभ है।
- चतुर्थी प्रारंभ: 14 सितंबर सुबह 07:06 बजे से
- स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त (मध्याह्न काल): सुबह 11:02 से दोपहर 01:31 बजे तक (2 घंटा 28 मिनट)
- बाराद्वार के लिए स्थानीय उत्तम समय: सुबह 10:35 से 01:05 बजे तक
- विसर्जन: शुक्रवार, 25 सितंबर (अनंत चतुर्दशी)
- सावधानी: 14 सितंबर को सुबह 09:01 से रात 08:08 बजे तक चंद्र दर्शन से बचें, मिथ्या दोष लगता है।
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