बाराद्वार। नगर पंचायत में अध्यक्ष निधि और पार्षद निधि की जानकारी मांगने वाले मंडल अध्यक्ष के पत्र के बाद भाजपा के अंदर का असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा के कई पार्षद और पुराने कार्यकर्ता खुद मंडल अध्यक्ष की कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे हैं। पार्षदों का आरोप है कि मंडल अध्यक्ष संगठन के मुखिया के तौर पर समन्वय बनाने की जगह नगर पंचायत के हर छोटे-बड़े काम में सीधा दखल दे रहे हैं।
पार्षदों की 3 बड़ी नाराजगी
1. वार्ड के काम में दखल : पार्षदों का कहना है कि उनके वार्ड में कौन सा काम होगा, इसका फैसला वार्ड पार्षद को करना है। लेकिन मंडल अध्यक्ष की अपनी ढपली है , इसका असर पार्षदों की साख पर पड़ रहा है।
2. वरिष्ठों की उपेक्षा : नगर में भाजपा को 10 साल बाद सत्ता में लाने वाले वरिष्ठ कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। आरोप है कि पुराने कार्यकर्ताओं को पूछा नहीं जा रहा, जबकि नगर पंचायत के कामों में चुनिंदा लोगों को तवज्जो दी जा रही है।
3. अध्यक्ष को घेरने की रणनीति : नगर में चर्चा है कि यह पत्र पारदर्शिता के लिए कम और अध्यक्ष पर दबाव बनाने के लिए ज्यादा लिखा गया है। अध्यक्ष निधि का हिसाब मांगना कहीं न कहीं अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करना है, जबकि संगठन को तो अध्यक्ष के साथ खड़ा होना चाहिए। एक वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमने 10 साल मेहनत की तब जाकर नगर पंचायत में कमल खिला है। अब अगर संगठन और सत्ता आपस में ही लड़ेंगे तो इसका नुकसान पार्टी को होगा।”
अब देखना यह है कि भाजपा का जिला संगठन इस अंतर्कलह को कैसे संभालता है। क्या ट्रिपल इंजन की आपसी खींचतान से विकास की रफ्तार थमेगी ?
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