बाराद्वार में डोलोमाइट का डंक, बिना तिरपाल दौड़ रहे वाहन


पर्यावरण नियमों की धज्जियां: खदान से रैक पॉइंट तक 10 KM तक उड़ रही डोलोमाइट की धूल, रेलवे का सिर्फ आश्वासन
बाराद्वार। खदान से डोलोमाइट क्रशर और फिर बाराद्वार रैक पॉइंट तक परिवहन में पर्यावरण नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खदान से क्रशर और वहां से साइज करने के बाद बाराद्वार रैक पॉइंट तक डोलोमाइट पहुंचाया जाता है, जहां से इसे संबंधित उद्योगों को भेजा जाता है।
10 किलोमीटर तक धूल का आतंक: खदान से क्रशर और बाराद्वार रैक पॉइंट पहुंचने के लिए डोलोमाइट लोड गाड़ियां करीब 10 किलोमीटर की दूरी तय करती हैं। इस दौरान ये ट्रक ग्रामीण इलाकों और जैजैपुर-बाराद्वार मुख्य सड़क से होकर गुजरते हैं।
न तिरपाल, न पानी का छिड़काव: नियमों के मुताबिक परिवहन के दौरान गाड़ियों को तिरपाल से ढका जाना चाहिए और क्रशिंग के दौरान पानी का छिड़काव जरूरी है। लेकिन हकीकत में न तो क्रशर प्लांट में पानी का छिड़काव किया जाता है और न ही परिवहन के दौरान ट्रकों को तिरपाल से ढका जाता है। इससे पूरी सड़क पर डोलोमाइट की धूल उड़ती रहती है।
एक दर्जन क्रशर, घनी आबादी में रैक पॉइंट: बाराद्वार क्षेत्र में करीब एक दर्जन क्रशर प्लांट संचालित हैं। रैक पॉइंट घनी आबादी से सटा हुआ है। प्रदूषण से बचाव के लिए यहां स्प्रिंकलर की कोई व्यवस्था नहीं है। धूल और प्रदूषण से परेशान लोगों और ट्रांसपोर्टरों के बीच आए दिन विवाद की स्थिति बनी रहती है।
रेलवे दे रहा सिर्फ आश्वासन: स्थानीय लोगों ने कई बार पानी छिड़काव की समुचित व्यवस्था की मांग की, लेकिन रेलवे प्रशासन की ओर से अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
पर्यावरण मंजूरी की शर्तें हवा में: खदान संचालन के लिए पर्यावरण मंजूरी में पानी का छिड़काव और तिरपाल से ढककर परिवहन अनिवार्य शर्त है। लेकिन खदान मालिक इन शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे लोगों का स्वास्थ्य खतरे में है।


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