बाराद्वार में कल से गूंजेगा ‘गणपति बप्पा मोरया’, सज गए आकर्षक पंडाल, 10 दिन तक भक्ति के रंग में रंगेगा नगर

बाराद्वार। इंतजार की घड़ियां खत्म हुईं। कल सोमवार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को नगर में प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश का भव्य आगमन होगा। जैसे ही बप्पा अपने सुंदर पंडालों में विराजेंगे, वैसे ही पूरे बाराद्वार की फिजा ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया’ के जयघोष से गूंज उठेगी। घर-घर में भी श्रद्धालु पूरे विधि-विधान और धूमधाम से बप्पा की स्थापना करेंगे।
अगले पूरे दस दिनों तक नगर में भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। सुबह-शाम आरती, ढोल-नगाड़ों की थाप और मोदक का भोग, हर तरफ बप्पा ही बप्पा नजर आएंगे। श्रद्धालु पूरे भक्ति-भाव में डूबकर विघ्नहर्ता से नगर की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे।

मौसम की बेरुखी भी नहीं रोक पाएगी आस्था
पिछले दो दिनों से मौसम थोड़ा आंख-मिचौली खेल रहा है, कभी धूप तो कभी बदली। पर कहते हैं न, जहाँ श्रद्धा होती है वहाँ बाधा टिक नहीं पाती। आयोजकों का कहना है कि थोड़ी बारिश भी हुई तो पंडाल वाटरप्रूफ हैं और भक्तों के जोश में कोई कमी नहीं आएगी।

मारवाड़ी पंचायत धर्मशाला – आस्था का मुख्य केंद्र
नगर के गणेशोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण हर साल की तरह इस बार भी मारवाड़ी पंचायत धर्मशाला ही रहेगा। यहाँ के आयोजकों ने इस बार दिल खोलकर मेहनत की है। जानकारी के अनुसार यहाँ भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा के साथ-साथ पौराणिक कथाओं पर आधारित दर्जनभर से अधिक जीवंत झांकियां बनाई गई हैं। शिव-पार्वती, कृष्ण-लीला से लेकर सामाजिक संदेश देती झांकियां लोगों को खूब भाएंगी। इसे देखने के लिए बाराद्वार ही नहीं, बल्कि सक्ती, जैजैपुर, मालखरौदा और आसपास के ग्रामीण अंचलों से हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।

युवा जोश से सजे चौक-चौराहे
इस बार युवाओं में अलग ही उत्साह है। नगर के प्रमुख आजाद बॉयज ग्रुप ने अपने पंडाल को खास तरह के थीम पर सजाया है, तो तहलका ग्रुप ने लाइटिंग और साउंड में कोई कसर नहीं छोड़ी। बिच्छू ग्रुप का पंडाल भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसके अलावा अग्रसेन मार्ग , नेहरू चौक, सोसायटी रोड , मंडी चौक सहित लगभग हर प्रमुख चौराहे पर पंडालों को फूलों, लाइटों और कारीगरी से बेहद आकर्षक रूप दिया गया है। शाम ढलते ही इन पंडालों की रौनक देखते ही बनती है।

अब बारी माँ दुर्गा और विश्वकर्मा जी की
एक ओर जहाँ कल गणपति स्थापना होगी, वहीं दूसरी ओर कलकत्ता से आए बंगाली मूर्तिकारों के हाथ अब और तेज चलेंगे। वे अब भगवान विश्वकर्मा और आदिशक्ति माँ दुर्गा की विशाल प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुट जाएंगे। यानी गणेशोत्सव के साथ ही शारदीय नवरात्रि की तैयारियों ने भी जोर पकड़ लिया है। कुल मिलाकर, आज रविवार को उमस भरी बदरिया ने थोड़ा परेशान जरूर किया, पर कल से शुरू हो रहे गणेशोत्सव को लेकर नगरवासियों में जो उत्साह है, उसके आगे सब फीका है। यदि मौसम ने साथ दे दिया तो इस बार का गणेशोत्सव बाराद्वार में पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा।


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