अध्यक्ष चुनाव में “कांग्रेस मुक्त” का दावा करने वाली भाजपा, उपाध्यक्ष में खुद “संगठन मुक्त” हो गई। नेता प्रतिपक्ष के गृह क्षेत्र में हुई हार से 2028 से पहले बढ़ी टेंशन_
सक्ती।नगर पंचायत बनने के बाद बम्हनीडीह में हुए पहले चुनाव को प्रदेश की राजनीति में “प्रतिष्ठा का चुनाव” कहा जा रहा था। कारण साफ था – ये विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत का गृह क्षेत्र और सबसे मजबूत गढ़ है।
इसलिए सत्ता पक्ष ने भी और विपक्ष ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी।
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा की ओर से प्रदेश के कई मंत्रियों ने बम्हनीडीह में डेरा जमाया। बैठकों का दौर चला। वहीं कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सभाएं कीं। कांग्रेस ने चुनाव की कमान पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को सौंपी। उनके साथ जैजैपुर , जांजगीर-चांपा , पामगढ़ और अकलतरा क्षेत्र के विधायक व चांपा के पूर्व विधायक मोतीलाल देवांगन को भी मैदान में उतारा गया। मतगणना के दिन भाजपा ने अध्यक्ष पद सहित 15 में से 11 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। पार्टी कार्यालय में जमकर जश्न हुआ। भाजपा नेताओं ने मंच से कहा “ये परिणाम साबित करता है कि जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया है।” लेकिन कुछ दिनों के अंदर ही ये जश्न निराशा में बदल गया।
उपाध्यक्ष चुनाव: गुटबाजी ने डुबोई भाजपा की नैया
नगर पंचायत के उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। संगठन ने वरिष्ठ पार्षद रामकली पटेल को अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया था। लेकिन नामांकन के दिन पार्टी का कोई भी पार्षद उनके साथ खड़ा नहीं दिखा और प्रस्तावक नहीं मिलने के कारण रामकली पटेल का नामांकन पत्र ही निरस्त हो गया।
वहीं संगठन से नाराज चल रहे पार्षद मोहन डडसेना ने समय रहते नामांकन दाखिल कर दिया। उन्हें पर्याप्त समर्थन मिला और वे निर्विरोध उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित कर दिए गए।
संगठन पर सबसे बड़ा सवाल
15 सदस्यीय नगर पंचायत में भाजपा के 11 पार्षद, कांग्रेस के 3 और 1 निर्दलीय है। इतने बड़े बहुमत के बाद भी संगठन अपना अधिकृत उम्मीदवार नहीं जिता पाया। ये सीधे तौर पर जिलास्तर के संगठन की नाकामी और अनुशासनहीनता को दर्शाता है।
क्या बोले जिम्मेदार
आशीष तिवारी, मंडल अध्यक्ष भाजपा बम्हनीडीह: “संगठन ने रामकली पटेल को अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया था। जो भी संगठन के खिलाफ गया है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
पवन कोसमा, एसडीएम “निर्वाचन प्रक्रिया के तहत एक आवेदन समय सीमा के भीतर आया जिसे मान्य किया गया। दो आवेदन समय के बाद प्राप्त हुए।”
कांग्रेस का तीखा हमला: “अध्यक्ष चुनाव के बाद भाजपा ढोल पीट रही थी कि जनता ने कांग्रेस को नकारा। अब उपाध्यक्ष चुनाव में जनता ने भाजपा के संगठन को ही नकार दिया। ये उनकी आपसी फूट और अहंकार का नतीजा है। जो पार्टी अपने घर में अनुशासन नहीं रख सकती, वो प्रदेश में सुशासन की बात कैसे करेगी?”
राजनीतिक मायने और 2028 का संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष के गृह क्षेत्र में पहले अध्यक्ष चुनाव जीतना और फिर उपाध्यक्ष चुनाव में संगठन का उम्मीदवार हार जाना भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। संगठन की दृष्टि से बम्हनीडीह सक्ती जिले में आता है। ऐसे में जिले के आला नेताओं की जवाबदेही भी तय होगी। 2028 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले ये घटना भाजपा के लिए सबक है।
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