सक्ती। विश्व हिंदू परिषद मध्य क्षेत्र के नैतिक शिक्षा प्रमुख एस पी शर्मा ने कहा कि शिक्षा मंदिरों से ही राष्ट्रीय भाव का जागरण बेहतर तरीके से संभव है।
उन्होंने अशासकीय विद्यालयों के प्रबंधकों से संवाद करते हुए कहा कि आज समाज में नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है और देश में “राष्ट्र प्रथम” का भाव कमजोर पड़ रहा है। इसका कारण पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव है। अंग्रेजों ने हमें संस्कार विहीन भौतिकता वादी शिक्षा की ओर ढकेल दिया, जिसके चलते हम रिश्तों, संबंधों और इंसानियत को भूलते चले गए। श्री शर्मा ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में शिक्षा संस्थानों के माध्यम से ही भावी पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों की जानकारी देकर नैतिक शिक्षा के जरिए समाज में राष्ट्रीय भाव जगाया जा सकता है। उन्होंने सभी विद्यालय संचालकों से आग्रह किया कि वे अपने स्कूलों में भारतीय संस्कृति एवं परंपरा आधारित साहित्यों का अध्यापन अवश्य कराएं। इस अवसर पर
विश्व हिंदू परिषद के आग्रह पर हुई इस विशेष बैठक में अशासकीय विद्यालय प्रबंधक कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि संस्कार विहीन शिक्षा समाज को पतन की ओर ले जाती है। इसलिए हम सबको भावी पीढ़ी को भारतीय संस्कृति- परंपरा आधारित साहित्य पढ़ाने के साथ नैतिक मूल्यों की स्थापना में योगदान देना चाहिए। इस अवसर पर VHP जिला अध्यक्ष सुदामा चंद्रा, मंत्री ओमप्रकाश राठौर सहित कई स्कूल संचालक उपस्थित रहे।योगेश साहू, दुलीचंद साहू, विनोद साहू, सरोज दास महंत, पुष्पेंद्र चंद्रा, नकुल भारद्वाज, खिलावन साहू, आर्य मैडम आदि।
JBD AV स्कूल, परमेश्वरी पब्लिक स्कूल, गुंजन पब्लिक स्कूल, शिशु भारती कॉन्वेंट आदि विद्यालयों के संचालक-प्रतिनिधि भी शामिल हुए।आर्य मैडम ने गायत्री परिवार की संस्कृति ज्ञान परीक्षा को इस दिशा में अच्छी पहल बताया।

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