बाराद्वार। आदिशक्ति की आराधना का पावन महापर्व शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ कल 11 अक्टूबर, रविवार से होने जा रहा है। पर्व के स्वागत के लिए पूरा अंचल भक्तिमय हो चला है। जैसे-जैसे घट स्थापना की घड़ी नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे लोगों में उत्साह और आस्था का संगम देखते ही बन रहा है।


नगर सहित ग्रामीण अंचलों के देवी मंदिरों में तैयारी अंतिम चरण में है। धर्मशाला मोहल्ला स्थित सिद्धपीठ मां काली मंदिर, दुर्गा मंदिर, गुलाब मंदिर, बंजारी माता मंदिर सहित सभी छोटे-बड़े देवी धामों को दुल्हन की तरह सजाया गया है। मंदिरों में नए रंग-रोगन के साथ ही आकर्षक विद्युत सज्जा, रंग-बिरंगी झालरों और फूलों के तोरण द्वार लगाए गए हैं। रात होते ही मंदिरों की जगमगाहट देखते ही बन रही है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। मंदिर परिसरों में माता रानी के जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी है।
सैकड़ों मनोकामना ज्योति कलश होंगे प्रज्ज्वलित
बाराद्वार के देवी मंदिरों की सबसे बड़ी पहचान यहां की मनोकामना ज्योति कलश परंपरा है। इस बार भी धर्मशाला स्थित काली मंदिर में घी और तेल के सैकड़ों ज्योति कलश एक साथ प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। दूर-दराज के शहरों से श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामना लेकर ज्योत प्रज्ज्वलित करने आते हैं। मंदिर समिति के अनुसार इस बार भीड़ को देखते हुए ज्योति कलश स्थापना, दर्शन पंक्ति और निकास के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मान्यता है कि सच्चे मन और अटूट आस्था के साथ नवरात्रि में ज्योत प्रज्ज्वलित करने से माता रानी भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होगी घट स्थापना
पंडितों के अनुसार इस बार शारदीय नवरात्रि का विशेष संयोग है। रविवार को शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ घर-घर और मंदिरों में घट स्थापना होगी। इसी के साथ नौ दिनों तक चलने वाली शक्ति उपासना का विधिवत शुभारंभ हो जाएगा।
नवरात्रि के दौरान मंदिरों में तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही माता के दरबार खुल जाएंगे। दिन भर दर्शन, अभिषेक, श्रृंगार, दुर्गा सप्तशती, देवी अथर्वशीर्ष, श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र का पाठ, हवन-पूजन और संध्या काल में भव्य महाआरती होगी। देर रात तक भक्त माता के दरबार में हाजिरी लगाते रहेंगे।
बाजार में दिन भर रही रौनक
नवरात्रि की पूर्व संध्या पर शनिवार को बाराद्वार के मुख्य बाजार में दिन भर चहल-पहल रही। पूजा-पाठ की सामग्री की दुकानों पर सुबह से ही भीड़ उमड़ी रही। महिलाओं ने चुनरी, श्रृंगार सामग्री, रोली, कुमकुम, सिंदूर, नारियल, अगरबत्ती, कपूर, सुगंधित फूल, गजरा और सजावट के सामान की जमकर खरीददारी की। दुकानदारों के अनुसार इस बार बाजार में नई डिजाइन की चुनरी और इलेक्ट्रॉनिक झालरों की विशेष मांग है।
कुल मिलाकर कहें तो बाराद्वार पूरी तरह से देवीमय हो चुका है और सभी को कल से शुरू होने वाले इस महापर्व का बेसब्री से इंतजार है।
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