बाराद्वार। दस साल बाद बाराद्वार नगर पंचायत में भाजपा का अध्यक्ष बैठा है। प्रदेश में भाजपा, केंद्र में भाजपा, यानी ट्रिपल इंजन की सरकार। लेकिन इंजन आपस में ही टकरा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा सबूत यह पत्र है।

भाजपा बाराद्वार मंडल अध्यक्ष गेंदराम मनहर ने दिनांक 21/09/26 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नगर पंचायत बाराद्वार को एक पत्र (क्रमांक 115) लिखा है, जिस पर 24/09/26 को कार्यालय में 253 नंबर पर रिसीविंग भी लगी है।
पत्र में क्या मांगा है ?
मंडल अध्यक्ष ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत अध्यक्ष निधि और सभी पार्षद निधि का पूरा ब्योरा मांगा है। पत्र में 8 बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है
- पार्षद निधि में कुल कितनी राशि स्वीकृत हुई?
- प्रत्येक पार्षद को कितनी राशि मिली?
- वार्डवार कार्यों की सूची और स्वीकृत राशि?
- अब तक कितना खर्च हुआ और कितना शेष है?
- अध्यक्ष निधि की कुल राशि?
- अध्यक्ष निधि से स्वीकृत कार्यों की सूची?
- दोनों निधियों में शेष राशि कितनी है?
- स्वीकृति आदेश, कार्यादेश और भुगतान का पूरा विवरण।
अंत में लिखा है – “ताकि नागरिकों को विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त हो सके।”
अब इस पत्र पर ही सवाल –
भैया, सवाल यह है कि जब नगर पंचायत में आपकी ही पार्टी के अध्यक्ष महोदय बैठे हैं, 15 में से 9 पार्षद आपके ही हैं, तो यह जानकारी आप अपने अध्यक्ष को फोन करके या बैठक में क्यों नहीं ले लेते? इसके लिए आपको सीएमओ को लेटरहेड पर 8 बिंदुओं का औपचारिक पत्र लिखने की क्या जरूरत पड़ गई?
यह साफ दिखा रहा है कि या तो नगर पंचायत अध्यक्ष अपने ही मंडल अध्यक्ष को भाव नहीं दे रहे, या मंडल अध्यक्ष का निकाय में इतना सीधा दखल है कि अध्यक्ष उनसे कन्नी काट रहे हैं। दोनों ही स्थिति में भाजपा का अंदरूनी कलह उजागर हो रहा है।
चर्चा तो यह भी है कि वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और हर काम में दखलंदाजी से कई पार्षद पहले से ही नाराज चल रहे हैं। अब यह पत्र लिखकर मंडल अध्यक्ष ने एक तीर से दो निशाने लगाए हैं – एक तरफ अध्यक्ष पर दबाव बनाना कि मैं भी कुछ हूं, और दूसरी तरफ नागरिकों के सामने खुद को पारदर्शिता का मसीहा दिखाना।
ट्रिपल इंजन की सरकार में अगर संगठन और सत्ता एक साथ नहीं चलेंगे तो विकास तो कागजों में ही रहेगा।
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