राजनांदगांव-रायपुर की तर्ज पर सजावट-झांकी और महाप्रसाद बना पहचान, बोले श्रद्धालु- धर्म में धन लगे, इससे बड़ा सौभाग्य नहीं

बाराद्वार। प्रदेश में गणेशोत्सव की धूम के बीच सक्ती जिले का बाराद्वार नगर अब नई पहचान के साथ उभर रहा है। अब तक गणेशोत्सव का केंद्र कहे जाने वाले राजनांदगांव और रायपुर के साथ अब बाराद्वार का नाम भी श्रद्धा के साथ लिया जाने लगा है।
यहां की भव्य सजावट, जीवंत झांकियां और दस दिनों तक हजारों श्रद्धालुओं के लिए अनवरत चलने वाली मीठे- नमकीन प्रसाद की व्यवस्था ने बाराद्वार को अलग मुकाम दिया है। इस प्रसिद्धि की गूंज अब सीमाएं लांघकर दूरस्थ शहरों तक पहुंच रही है।
इसके मूल में है नगरवासियों का विघ्नहर्ता के प्रति अटूट समर्पण। यहां प्रतिस्पर्धा सजावट की नहीं, सेवा की है। पंडाल सजते ही लोगों ने प्रसाद के लिए दिल और तिजोरी दोनों खोल दिए हैं। हर समिति पर जैसे मां अन्नपूर्णा की कृपा है, भंडारा कभी रीतता नहीं।
श्रद्धालु कहते हैं, “धन अगर धर्म में लगे तो इससे बड़ा सौभाग्य और क्या होगा। इससे धन की शुद्धि होती है और पुण्य का संचय होता है।” लोगों का मानना है कि उत्सव के विस्तार के साथ ही अंचल में सुख, समृद्धि और आपसी एकता का भाव भी बढ़ा है।
भक्ति और भाईचारे की मिसाल, एसपी ने दिया साधुवाद
शनिवार की रात सक्ती पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर सपरिवार बाराद्वार पहुंचे। उन्होंने विभिन्न पंडालों में स्थापित श्री गणेश प्रतिमाओं के दर्शन किए और आयोजन समितियों से आत्मीय चर्चा की।
व्यवस्थाओं को देखकर अभिभूत एसपी श्री ठाकुर ने समितियों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा, “बाराद्वार का गणेशोत्सव केवल उत्सव नहीं, यह श्रद्धा, भक्ति और आपसी भाई-चारे की जीवंत मिसाल है।” उन्होंने इस अनुशासित और भक्तिमय आयोजन के लिए सभी आयोजकों और नगरवासियों को साधुवाद दिया।
उनके आगमन से कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर गया। ढोल-ताशों की मंगल ध्वनि और गगनभेदी ‘गणपति बप्पा मोरया’ के उद्घोष से समूचा नगर भक्तिरस में सराबोर नजर आया।


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