बप्पा के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, मेले की रौनक लौटी

बाराद्वार। इस बार गणेशोत्सव पर इंद्रदेव भी बप्पा के भक्त बन गए हैं। अबकी बार मौसम ने ऐसी करवट ली कि पूरे मेले का नजारा ही बदल गया।

नगर के विभिन्न चौक-चौराहों में बीस से ज्यादा समितियां गणेश उत्सव को भव्यता देने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। कहीं विशाल पंडाल सज रहे हैं तो कहीं आकर्षक लाइटिंग और थीम से बप्पा के दरबार को दिव्य रूप दिया जा रहा है। समितियों की इस मेहनत का असर अब दिखने लगा है। जैसे ही शाम ढलती है, हर चौक-चौराहे पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है और देर रात तक पंडालों में पैर रखने की जगह नहीं बचती।

आज का भक्त सिर्फ दर्शन नहीं करता, उसे यादों में भी कैद करना चाहता है। हर पंडाल के बाहर सेल्फी और ग्रुप फोटो का दौर चल रहा है। सबकी एक ही लालसा है, इस उत्सव को सबसे यादगार बनाना।

प्रसाद बांटने में तो समितियों के बीच होड़ लगी है। विघ्नहर्ता को तरह-तरह के मिष्ठानों का भोग लगाया जा रहा है, वहीं भक्तों के लिए स्वादिष्ट नमकीन और मिठाइयां दिल खोलकर बांटी जा रही हैं।

सबसे ज्यादा खुश हैं मेले वाले। एक दुकानदार ने कहा, “पिछले साल बरसात ने सारा धंधा चौपट कर दिया था। इस बार लगता है बप्पा की सीधी कृपा बरस रही है। मौसम ऐसा ही रहा तो इस बार सारा घाटा निकल जाएगा।

आस्था, मेहनत और मेहरबान मौसम के इस संगम को देखकर तय है, इस वर्ष बाराद्वार में गणेश उत्सव के पिछले सारे रिकॉर्ड टूट जाएंगे।

पंडाल सिर्फ एक पंडाल नहीं, बल्कि चलता-फिरता धर्म-धाम है।

इस वर्ष समिति ने बच्चों में सनातन संस्कृति का ज्ञान बढ़ाने के लिए कई विशेष झांकियों को सजाया है, जो इस बार आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं –

1. कैलाश दर्शन: पंडाल के प्रवेश द्वार पर ही बादलों के बीच कैलाश पर्वत, नंदी पर विराजे भगवान शिव और शेर पर सवार मां पार्वती की दिव्य झांकी श्रद्धालुओं का मन मोह रही है।

2. जगन्नाथ धाम: फूलों से सजे गलियारे में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की झांकी पुरी धाम का एहसास करा रही है।

3. सूर्यदेव का रथ: सात सफेद घोड़ों के रथ पर सवार सूर्यदेव की झांकी नवग्रहों का ज्ञान दे रही है।

4. मित्रता का प्रतीक: कृष्ण-सुदामा मिलन और ऋषि-मुनियों के यज्ञ की झांकियां सच्ची मित्रता और वैदिक परंपरा का संदेश दे रही हैं।

5. राधा-कृष्ण का झूला: वृंदावन में झूला झूलते राधा- कृष्ण की मनमोहक झांकी के सामने सेल्फी लेने के लिए भक्तों की होड़ लगी है।

समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि आस्था के साथ-साथ बच्चों को हमारे ग्रंथों और परंपराओं से जोड़ना ही इस बार के पंडाल का मुख्य उद्देश्य है।


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