“बाराद्वार के आत्मानंद स्कूल में दो कमेटी का घमासान, नई SMC बनी फिर भी पुरानी SMDC से बैठक, प्राचार्य पर राजनीतिक संरक्षण का गंभीर आरोप*

बाराद्वार।जिला सक्ती के सबसे बड़े शासकीय स्कूलों में से एक स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी/हिन्दी माध्यम विद्यालय बाराद्वार में इन दिनों दो प्रबंधन समितियों के बीच जंग छिड़ी हुई है। कागजों में नई समिति बन चुकी है , लेकिन जमीन पर पुरानी समिति से ही काम चलाया जा रहा है।
पूरा मामला शासन के आदेशों की अलग-अलग व्याख्या और प्राचार्य की कार्यशैली से जुड़ा है।
पहले समझिए टाइमलाइन – कैसे बना पेंच
12 जून 2026 – छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय महानदी भवन नया रायपुर ने आदेश क्रमांक GENS-11/5538/2026 जारी किया। इसमें साफ कहा गया कि अब पूरे प्रदेश में SMDC (शाला प्रबंधन एवं विकास समिति) खत्म होगी और उसकी जगह भारत सरकार की नई Guideline for SMCs-2026 के तहत नई SMC (शाला प्रबंधन समिति) बनेगी।

15 जुलाई 2026 – इसी आदेश के पालन में प्राचार्य ऋषिकेश गुप्ता ने बाराद्वार स्कूल में पालकों की सर्वसहमति से नई SMC का गठन कर दिया। पत्र क्रमांक/40/SMC/2026 से DEO सक्ती को सूचना भी भेज दी गई। नई समिति में अध्यक्ष देवेन्द्र यादव, उपाध्यक्ष श्रीमती अनिता महंत, सचिव प्राचार्य स्वयं और 14 अन्य पालक, शिक्षक, शिक्षाविद सदस्य बनाए गए।

05 अगस्त 2026 – लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) रायपुर ने पत्र क्रमांक/विद्या/63/स्वतंत्रता दिवस/2026-27/455 जारी किया। इसमें कहा गया कि प्रदेश की सभी शालाओं में नई गाइडलाइन-2026 के अनुसार SMC का गठन नहीं हुआ है, इसलिए 15 अगस्त का ध्वजारोहण पूर्व वर्षों की भांति किया जाए।

11 अगस्त 2026 – DPI ने फिर संशोधित आदेश क्र. 468 जारी किया।

असली खेल यहीं से शुरू होता है –
जानकारों का कहना है कि सभी स्कूलों में नई कमेटी का गठन समय पर पूरा नहीं हो पाया। इसलिए सरकार नहीं चाहती थी कि 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व पर विवाद हो। इसलिए कहा गया कि स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम पुरानी समिति के माध्यम से ही संपन्न करा लें, ताकि पार्टी के पुराने मनोनीत अध्यक्षों को महत्व मिल जाए और उन्हीं के हाथों ध्वजारोहण हो। लेकिन DPI के किसी भी लिखित आदेश में यह कहीं नहीं लिखा है कि “SMC की जगह SMDC से ही काम लेना है” या SMC को निरस्त माना जाए। आदेश सिर्फ 15 अगस्त के कार्यक्रम तक सीमित था।

25 अगस्त को क्यों बुलाई पुरानी कमेटी की बैठक?
इसी को आधार बनाकर प्राचार्य ने 25/08/2026 को पुरानी SMDC की बैठक बुला ली। जब नई SMC के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने इस पर आपत्ति जताते हुए पत्र लिखा, तो प्राचार्य ने 01.09.2026 को पत्र क्र. 61/बैठक/जानकारी/2026 जारी कर जवाब दिया। उस पत्र में प्राचार्य ने लिखा है कि –
“लोक शिक्षण संचालनालय के पत्र दिनांक 05/08/2026 एवं 11/08/2026 के अनुसार SMC को पूर्ण नहीं माना गया है एवं DEO सक्ती से प्राप्त मौखिक निर्देश के अनुसार SMC की जगह SMDC से ही काम लेना है। अतः दिनांक 25/08/2026 को SMDC की बैठक को अवैधानिक नहीं माना जा सकता।” बस इसी एक लाइन पर पूरा विवाद टिका है।

आरोप – प्राचार्य राजनैतिक संरक्षण में कर रहे काम
नई SMC के अध्यक्ष और पालकों का सीधा आरोप है कि प्राचार्य राजनैतिक संरक्षण के लिए मनमानी कर रहे हैं। उनका तर्क है – जब 15 जुलाई को नई SMC बन गई और DEO को सूचना चली गई, तो वह वैध है।
DPI का आदेश केवल 15 अगस्त के ध्वजारोहण के लिए था, 15 अगस्त के बाद बैठक बुलाने के लिए नहीं। अगर DEO का मौखिक निर्देश था भी, तो लिखित आदेश कहां है? मौखिक निर्देश पर नई बनी वैध समिति को कैसे दरकिनार किया जा सकता है? 15 अगस्त के बाद भी पुरानी समिति की बैठक बुलाना यह दिखाता है कि प्राचार्य जानबूझकर नई समिति को काम नहीं करने देना चाहते।
अब देखना होगा कि जिला शिक्षा अधिकारी सक्ती इस पूरे मामले में किसे वैध मानते हैं – 15 जुलाई को बनी नई SMC को या 25 अगस्त को बुलाई गई पुरानी SMDC को।
फिलहाल बाराद्वार के इस प्रतिष्ठित स्कूल में दो अध्यक्ष, दो समितियां और आदेशों की खींचतान से पालकों में भारी आक्रोश है।


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