सक्ती। राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग (विधि) के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने शक्ति जिले में नाबालिगों की अपराधों में बढ़ती संलिप्तता पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। श्री पटेल ने कहा कि जिस उम्र में बच्चों के हाथ में किताब होनी चाहिए, वहां चाकू-कटर और हथियार आ गए हैं। जोंगरा हत्याकांड, शक्ति स्टेशन कटर कांड और परसदा नाबालिग हत्याकांड में बाल अपराधियों की संलिप्तता यह साबित करती है कि मोबाइल, सट्टा और नशे के दुष्प्रभाव से बच्चों का मानसिक स्तर गिर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। माता-पिता की उदासीनता, स्कूलों में नैतिक शिक्षा का अभाव और अश्लील कंटेंट बच्चों को अपराध की ओर धकेल रहे हैं। समाज को भी इस दिशा में जागरूकता लानी होगी।
श्री पटेल ने पुलिस प्रशासन से अपेक्षा की कि केवल अपराधियों को पकड़कर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बजाय स्कूल-कॉलेजों में नैतिक मूल्यों और साइबर जागरूकता के कार्यक्रम चलाए जाएं। साथ ही सट्टा और नशे के नेटवर्क पर जड़ से कार्रवाई जरूरी है, क्योंकि इन्हीं के कारण मारपीट, लूट और हत्या जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन “अपराध हो जाने के बाद कार्रवाई” के बजाय “अपराध ही न हो” इस सोच के साथ काम करने की जरूरत है। तभी शक्ति में शांति और अमन कायम रह सकेगा।
सक्ती में बढ़ रहे बाल अपराध, चिंता का विषय : अधिवक्ता चितरंजय पटेल
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